वियोगिन विरह की मारी

चारि महीना विछड़े होयगा | सपने म आय मिलौतेया हाथ || रात सेजरिया उधम मचौतेया || खड़ा सामने ठोंकतेया ताल || रतिया बैरन लाग विरावै || सोवै न दियय अँजोरिया …

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