आलू की फसल को किसान भाई झुलसा रोग व कीट से बचायें-जिला उद्यान अधिकारी

प्रतापगढ़ :- जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह ने किसान भाईयों को एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अवगत कराया है कि जनपद में आलू के अच्छे उत्पादन हेतु सम-सामयिक महत्व के कीट/व्याधियों का उचित समय पर नियंत्रण नितान्त आवश्यक है। आलू की फसल अगेती व पिछेती झुलसा रोग के प्रति अत्यन्त संवेदनशील होती है, प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंंदा-बांदी एवं नम वातावरण में झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है तथा फसल को भारी क्षति पहुॅचाती है। आलू की अच्छी पैदावार सुनिश्चित करने हेतु रक्षात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिये।
आलू की फसल को अगेती एवं पिछेती झुलसा रोग से बचाने के लिये जिंक मैगनीज कार्बामेट 2.0 से 2.5 किग्रा0 को 800-1000 लीटर पानी में अथवा जिंक मैगनीज 2.0 से 2.5 किग्रा0 800 से 1000 ली0 पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जाये तथा आवश्यकतानुसार 10 से 15 दिन के अन्तराल पर दूसरा छिड़काव कॉपर आक्सीक्लोराइड 2.5 से 3.0 किग्रा0 अथवा जिंग मैगनीज कार्बानेट 2.0 से 2.5 किग्रा0 तथा माहू कीट के प्रकोप की स्थिति में नियंत्रण के लिये दूसरे छिड़काव में फफूॅदनाशक के साथ कीट नाशक जैसे-डायमेथोएट 1.0 ली0 प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाकर छिड़काव करना चाहिये। जिन खेतों में अगेती व पिछेती झुलसा रोग का प्रकोप हो गया हो तो ऐसी स्थिति में रोकथाम के लिये अन्तःग्राही (सिस्टेमिक) फफूॅद नाशक मेटालेक्जिल युक्त रसायन 2.5 किग्रा0 अथवा साईमोक्जेनिल युक्त फफूॅदनाशक 3.0 किग्रा0 प्रति हेक्टेयर की दर से 800-1000 ली0 पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है।