एक निवाला कम खाओ लेकिन अपने बच्चों को ज़रूर पढ़ाओ: शहज़ादा कलीम

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पहले तालीम से तुम मोड़ दिये जाओगे
फ़िर किसी जुर्म से तुम जोड़ दिये जाओगे
हाथ से हाथ की ज़ंजीर बनाकर निकलो
वरना धागे की तरह तोड़ दिये जाओगे..!

✍️वाहिद मालेगाँवी का ये
शेर बेचैन भी करता है….और सोचने पर मजबूर भी.!

आज मैं पोस्ट इसलिये नहीं कर रहा हूँ के आप हमारी
तारीफ़ों के पुल बाँधें, आजकी पोस्ट इसलिये भी नहीं कर रहा हूँ के आप हमारी सोच को सराहें.., आज की पोस्ट का एक ख़ास मक़सद है..
आजकी पोस्ट के ज़रिये…आपसबके सामने मैं अपना वो ख़ाली दामन फ़ैला रहा हूँ..जिसको आपकी दुआओं और हौसले की ज़रूरत है..!

मैं नहीं जानता के जो क़दम मैं उठाने जा रहा हूँ उसमें कहाँ तक कामयाब होऊँगा, ये भी नहीं जानता के मुझपर कितनी उँगलियाँ उठेंगी, ये भी नहीं जानता के इल्ज़ाम कितने लगेंगे……लेकिन इतना ज़रूर जानता हूँ के अगर इस मिशन पर एक क़दम भी चलने में कामयाब होगया…तो इंशा अल्लाह मैं आने वाली नस्लों का वो शाहराह ज़रूर बनूँगा जिसको अपनाकर हमारी नस्लें एक कामयाब ज़िन्दगी की तरफ़ गामज़न हो सकेंगी..!

मैं अकसर कहता हूँ के पढ़ो…
सिर्फ़ और सिर्फ़ पहले पढ़ो….
जितना मुझसे बन पड़ता है बिना शोर-शराबे के
ख़ामोशी से काम भी करता हूँ….और इसलिये करता हूँ क्यूँकि तालीम के अलावा कोई रास्ता नहीं है जो हमारे हालात बेहतर कर सके…

हमें सोचना पड़ेगा, हमें फ़िक्र करनी पड़ेगी,
और अगर हमने नहीं सोचा, नहीं फ़िक्र की, चुपचाप अपनी बदहाली का तमाशा देखते रहे तो हमारी आने वाली नस्लें हमसे आपसे सवाल करेंगी..!

अगर ख़ुद को बदलना चाहते हो….
तो तालीम हासिल करो, एक निवाला कम खाओ लेकिन अपने बच्चों को पढ़ाओ,
क्योंकि……………….

तालीम ही तुम्हें ज़िन्दगी जीने का सलीक़ा सिखा सकती है, तालीम ही तुम्हारे एख़लाक़ को बेहतर बना सकती है, तालीम ही तुम्हें मज़हब को समझने और सही रास्ते पर चलने की समझ पैदा कर सकती है, तालीम ही तुम्हें इंसानियत और इंसानों से हुस्न-ए-एख़लाक़ सिखा सकती है, तालीम ही तुम्हें अपने वतन और हमवतन भाइयों से मुहब्बत करना सिखा सकती है, तालीम ही तुम्हें तरक़्क़ी के रास्ते पर चलने की समझ पैदा कर सकती है, तालीम ही तुम्हें ज़िन्दगी और दुनियाँ की तरक़्क़ी याफ़ता और जदीद (आधुनिक) रेस में ख़ुद को खड़ा रहने का हुनर पैदा कर सकती है, तालीम ही तुम्हारे अंदर सियासी समझ और शऊर पैदा कर सकती है,
इसलिये तालीम से जुड़ो, अपने बच्चों को पढ़ाओ, उन्हें आधुनिकता और टेक्नोलॉजी से जोड़ो….
डॉक्टर और इंजीनियर के साथ साथ उन्हें IAS, PCS और PCSJ बनाओ,
तलाशो अपने आसपास के होनहार बच्चों को, जिनमें कुछ कर गुज़रने की सलाहियत हो, अगर उनकी माली हालात कमज़ोर है तो गोद लो दो चार लोग मिलकर ऐसे बच्चों को…और तय्यारी करवाओ उन्हें सिविल सर्विसेज़ की..
अगर हर ज़िले से 3 सालों में भी तुम इसतरह के तीन बच्चों को भी IAS, PCS, या PCSJ या डॉक्टर इंजीनियर बनाने में कामयाब होगये…..तो याद रखना..तुम्हारी स्थिति और तुम्हारा नक़्शा बदल जायेगा…
आप सब अपने अपने ज़िले और इलाक़े में छोटे छोटे इदारे क़ायम करिये….यूनिवर्सिटी और बड़े कालेज न सही …अपनी हैसियत के मुताबिक़ शुरुआत करिये.एक छोटे ही इदारे की.,
जहाँ मेरी ज़रूरत पड़े पूरे देश में किसी भी जगह ..आप सिर्फ़ एक आवाज़ दीजिएगा इंशा अल्लाह बिना किसी शर्त के आप तक लोगों को बेदार करने पहुँचूँगा..!

इसी कड़ी में
मैं इंशा अल्लाह आने वाले रमज़ान में अल्लाह का नाम लेकर अपने ..स्कूल ..की शुरूआत करने ज़ारहा हूँ…जहाँ इब्तदाई तालीम के साथ साथ….उन ग़रीब बच्चों की तय्यारी के लिये फ़्री कोचिंग और क्लासेज चलवाऊँगा…जिनके अन्दर कुछ कर गुज़रने का जज़्बा है..!
मेरे पास अभी स्कूल के लिये सिर्फ़ ज़मीन के अलावा कुछ नहीं है…सिर्फ़ हौसला, नेक नीयत और ख़ाली हाथ ..!
ये भी सच है होसकता है मुझे भी सपने बेंचने वालों की फ़ेहरिस्त में रखकर मेरा मज़ाक़ बनाया जाय, हो सकता है मुझे भी मश्कूक निगाहों से देखा जायेगा, लेकिन इन सबकी परवाह किये बिना मैं सबके सामने दुआ और हौसले के लिये दामन फ़ैलाऊँगा..!

आख़िर में बस इतना कहना चाहूँगा …जब नमाज़ों में दुआ के लिये हाथ उठाना तो सिर्फ़ मेरे लिये इतनी दुआ कर देना के अगर मेरी नीयत में कोई खोट न हो तो अल्लाह मुझे मेरे मिशन में कामयाब करे..!