तूने मुझे ख़ुलूस का पैकर बना दिया, क़तरे की आरज़ू थी समंदर बना दिया…

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तूने मुझे ख़ुलूस का पैकर बना दिया,
क़तरे की आरज़ू थी समंदर बना दिया,

कल तक जो सादा लौह था अब संगदिल है वो,
झूठी अना ने उसको सितमगर बना दिया,

ग़ुरबत के दौर में जो तेरी याद आगयी,
तेरे करम ने मेरा मुक़द्दर बना दिया,

अये जाने वाले आ मेरे में क़याम कर,
इस बुतकदे को मैंने तेरा घर बना दिया,

सच पूछये तो पहले वो मासूम था अख्तर,
मेरी वफा ने उसको सितमगर बना दिया।

– अख़्तर इलाहाबादी