विरासत राष्ट्र की अमूल्य निधि : डॉ.पीयूष कान्त शर्मा

विश्व विरासत सप्ताह पर निकाली गयी रैली,पुरा निधियों की लगी प्रदर्शनी

रवि प्रकाश सिंह ” चन्दन”

प्रतापगढ़ । विश्व विरासत सप्ताह के अवसर पर राज्य पुरातत्व विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा पट्टी तहसील के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मध्य पाषाण कालीन पुरास्थल महदहा के निकट स्थित राजाराम पटेल इंटरमीडिएट कॉलेज में जनपद एवं निकटवर्ती क्षेत्रों के पुरास्थलों के छाया चित्रों, पाषाण कालीन उपकरणों, मृदभाण्डों, आभूषणों आदि पुरानिधियों की प्रदर्शिनी लगायी गयीं। प्रदर्शिनी का शुभारम्भ मुख्य अतिथि एमडीपीजी कॉलेज के प्राचीन इतिहास विभागाध्यक्ष पुराविद डॉ. पीयूष कान्त शर्मा ने किया।
लोगों को जागरूक करने के लिए विद्यालय से एक धरोहर जागरूकता रैली पुरास्थल महदहा तक निकली गयी । रैली को मुख्य अतिथि ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पुरास्थल महदहा पर ही ‘प्रतापगढ़ की समृद्ध विरासत’ विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। डॉ. पीयूष कान्त शर्मा ने कहा कि विरासत किसी भी राष्ट्र की अमूल्य निधि होती है। अपनी समृद्ध विरासत एवं संस्कृति के कारण ही भारत को विश्व गुरु का दर्जा प्राप्त है। प्रति वर्ष लाखों की संख्या मे अन्य देशों से पर्यटक इसे देखने और समझने भारत आते हैं। प्रतापगढ़ पुरातात्विक दृष्टि से अत्यन्त समृद्ध है। यहाँ महदहा जैसे 10 हजार साल पुराने मध्य पाषाणिक 100 पुरास्थल हैं। 1977-78 में कराए गए उत्खनन में महदहा से अनेक स्त्री – पुरुष के शवाधान प्राप्त हुए जिनमें दो कब्रों में स्त्री- पुरुष साथ-साथ दफनाये गए थे। शवों के गले में हड्डी के मनकों की माला तथा कान में हड्डी के कुण्डल मिले हैं। यह स्थान पाण्डवों से भी जुड़ा हुआ है।परम्परा के अनुसार अज्ञातवास के समय पाण्डव नजदीकी पुरास्थल बारडीह जिसे राजा विराट का किला कहा जाता है में वेष बदलकर रुके थे। राजा विराट के साले कीचक की द्रौपदी के अपमान की इच्छा के कारण भीम ने महदहा में कीचक का वध किया था। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, प्रयागराज डॉ आर. एन. पाल ने पुरातत्व इकाई के कार्यों का उल्लेख करते हुए स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर पुरातत्व इकाई के रमाकान्त, रंजीत सिंह, जनार्दन सिंह सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।