सावधान: यहां रात में बीमार होना मना है, नहीं मिलेंगे डाक्टर साहब, सुनें और देखें पूरी खबर

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इलाहाबाद/प्रयागराज। जिले के मऊआइमा स्वास्थ केंद्र पर तैनात चिकित्सकों की लापरवाही थमने का नाम नही ले रही है। ग्रामीणों से लगातार शिकायत मिलने पर एसीएमओ ने मऊआइमा प्राथमिक स्वास्थ केंद्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान रात्रिकालीन ड्यूटी में एक भी डॉक्टर मौजूद नही मिले।मामले की जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को देते हुए जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित की गयी है।
दरअसल
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए जाने के लिए सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात चिकित्सकों को हर हाल में केंद्र पर बने आवास पर ही रात्रि विश्राम करे्ने का आदेश दिया है।

लेकिन मऊआइमा स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चिकित्साधिकारी डा०विमलकांत वर्मा नियुक्ति के बाद से आज तक एक दिन भी स्वास्थ केंद्र पर रात्रि विश्राम करने की जहमत नही उठाई। दोपहर दो बजे तक ओपीडी खत्म होने के बाद अधिकांश चिकित्सक शहर स्थित अपने निजी आवास के लिए रवाना हो जाते हैं। इस कारण रात में आने वाले इमरजेंसी केस या तो सोरांव सीएचसी रेफर कर दिया जाता है या मरीजों को निजी अस्पताल में एडमिट के लिए मजबूर होना पड़ता है।

इस संबंध में दैनिक जागरण के क्षेत्रीय एडिशन में दो माह पूर्व मऊआइमा से संबंधित हरखपुर सीएचसी पर बदहाल स्वास्थ सविधाओं को लेकर लगातार कई दिन तक खबरें प्रकाशित की गयी थी।
मामले में क्षेत्रीय सांसद नागेन्द्र सिंह पटेल व पूर्व विधायक सत्यवीर मुन्ना ने भी संज्ञान लेते हुए उच्चाधिकारियों व सरकार से व्यवस्था में सुधार के लिए पत्र लिखा। जांच के बाद शिकायतें सही पाए जाने पर सीएमओ ने हरखपुर के स्वास्थ चिकित्सा अधिकारी डा०विमलकांत वर्मा को वहां से हटा कर मऊआइमा प्राथमिक स्वास्थ केंद्र का प्रभारी बना दिया।

ग्रामीणों की शिकायत पर गुरुवार को रात नौ बजे एसीएमओ डा० तीरथलाल ने मऊआइमा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। जांच में केंद्र पर न तो पीएचसी प्रभारी मौजूद मिले न ही अन्य कोई चिकित्सक। एसीएमओ ने बताया कि जांच में कोई भी चिकित्सक रात्रि विश्राम करते नही पाया गया है। मामले की जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी गयी है।

इस संबंध मऊआइमा के ब्लॉक प्रमुख सुधीर मौर्या का कहना है कि सरकार स्वास्थ सविधाएं मुहैया कराने हेतु कृतसंकल्प है। अनुपस्थित रहने वाले डाक्टरों की शिकायत मुख्यमंत्री से की जाएगी।

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