जिलाधिकारी महोदया, एक नजर इधर भी देखें, कड़ाके की ठंड में बेचारे प्लास्टिक की पन्नी तानकर कर रहे हैं गुजर

अमेठी से अशोक श्रीवास्तव के साथ हरिकेश यादव की रिपोर्ट

भारी शीतलहर और ठंड के प्रकोप के चलते लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया और लोग अपने आप को ठंड से बचाने के लिए तरह तरह के प्रयास कर रहे हैं ऐसे में गरीब और बेसहारा परिवारों के लिए जिनके पास रहने के लिए एक छत भी मुहैया नहीं है, अपना जीवन यापन कर रहे हैं। यह हाल है प्रदेश के वीवीआइपी जिला अमेठी का।

प्रदेश की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था सभी गरीब परिवारों को रहने के लिए घर मिलेगा लेकिन उनका दावा पूरी तरह से खोखला साबित हो रहा है।

आज जब संवाददाताओं की टीम अमेठी तहसील से आधा किलोमीटर दूर स्थित गायत्री नगर इलाके का भ्रमण किया तो देखा गरीब और बेसहारा लोग जो कभी सड़क के किनारे अपना आशियाना बना लेते तो कभी खुले खेतों में अपना आशियाना बना लेते कैसे ठंड में अपना जीवन जी रहे हैं। गरीब और बेसहारा लोग तो फटी पुरानी कपड़ों और पुरानी पॉलिथीन से अपना टेंट तैयार करते हैं और उसी में गुजर-बसर कर रहे हैं। इनके पास रहने के लिए न ही घर है और न ही इनकी सुधि लेने वाला प्रशासन भी मूक बधिर बना हुआ है जिसने अमेठी के मुख्य चौराहों पर अलाव की व्यवस्था किया है जिससे लोग ठंड से बच सके लेकिन गरीब लोगों के पास ठंड से बचाने के लिए न ही ठीक से कपड़े हैं और ना ही अलाव की व्यवस्था। अभी कुछ दिन पहले ही अमेठी जिले की जिलाधिकारी ने संग्रामपुर में गरीबों को ठंड से बचाने के लिए कंबल वितरित किया था आखिरकार इन गरीबों को ठंड से बचाने के लिए कौन कंबल वितरित करेगा यह अमेठी प्रशासन के सामने एक यक्ष प्रश्न जैसा है। वैसे तो तमाम समाज सेवी संगठन समय-समय पर कंबल और रजाई वितरित करते हैं जिससे गरीब अपने आप को ठंड से बचा सके लेकिन इन गरीब बेसहारा और आवास विहीन लोगों को ठंड से बचाने के लिए भाजपा तथा अन्य दलों के समाजसेवी कब आगे आएंगे क्या योगी जी का यही रामराज्य है जिसमें लोगों को ठंड से बचाने के लिए एक आदत कंबल भी मिलना मुश्किल है गरीब और बेसहारा लोग सरकार की तरफ कातर दृष्टि से देख रहे हैं कि उन्हें कब सुविधाएं प्रदान की जाए कब उनके अच्छे दिन आएंगे।