सिपाही भर्ती में महिला अभ्यर्थियों को 4 हफ़्ते में नियुक्ति देने पर निर्णय लेने का पुलिस भर्ती बोर्ड को हाईकोर्ट ने दिया आदेश, पढ़ें रिपोर्ट..

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रिपोर्ट – अंकित सिंह यादव, इलाहाबाद।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खण्डपीठ ने पुलिस भर्ती बोर्ड सहित विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर तल्ख़ टिप्पड़ी करते हुए कहा कि अधिकारियों ने भर्ती परीक्षाओं में योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज करने का चलन अपना लिया है।

अभ्यर्थी कोर्ट नही आ पाते है तो बिना किसी गलती के भी वह चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिए जाते है।सिपाही भर्ती की अभ्यर्थी नर्वदा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति इरशाद अली ने पुलिस भर्ती बोर्ड को निर्देश दिया है कि याची का दावा ओबीसी वर्ग के तहत सिपाही भर्ती 2015 में स्वीकार किया जाए। उसने अपने वर्ग में 415.09 अंक हासिल किया। परीक्षा में पास होने के बाद दस्तावेजों के सत्यापन के समय उसने मांगी गई तिथि का जाति प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया, साथ ही नवीनतम जाति प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत कर दिया। भर्ती बोर्ड ने इसी आधार पर उसे चयन से बाहर कर दिया, जबकि न्यूनतम कट ऑफ अंक से अधिक अंक उसने प्राप्त किये थे।

मामले में प्रमुख सचिव गृह की रिपोर्ट से साफ है कि अफसरों की लापरवाही से उसे सामान्य वर्ग का मान लिया गया और चयन से वंचित कट दिया था। याचिका पर अधिवक्ता सुनील यादव ने बहस की।