यादवो के महाकुम्भ का मेला सम्पन्न , देश प्रदेश के कई जिलों से आये यादव समाज के श्रद्धालु

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राम केवल यादव शाहगढ-अमेठी


यादवों के प्रमुख धार्मिक स्थल में शुमार बाबा नन्द महर पर कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला मेले में जनसैलाब उमड़ा जो गुरुवार दोपहर से शुरू हुआ शुक्रवार शाम तक विधिवत शांतिपूर्वक सम्पन्न हो गया। जिसमें देश प्रदेश से लाखो की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मेले का शांतिपूर्ण समापन हो जाने पर जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली। विदित हो कि जिला मुख्यालय गौरीगंज से लगभग 16 किलोमीटर दूर मुसाफिरखाना रोड पर नन्द महर धाम है। एक पुराना नन्द महर धाम नगर पालिका के बारीपुर गाँव के पास भी है। जहाँ पर इसी दिन मेला लगता है। पर श्रद्धालुओं की भीड़ नन्द महर सिथति धाम पर ही होती है। नन्द महर धाम नन्द बाबा योगेश्वर श्रीकृष्णा की यादों को समेटे हुए है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह धाम यादवो के प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में महत्त्व रखता है। एक मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्णा अपने भाई बलराम के साथ द्वारिका से काशी पौड्रिक नामक घमंडी राजा को मारने गए थे। काफी दिन वापस न लौटने के बाद नन्द बाबा व वासुदेव उन्हें ढूढने निकले जिनकी मुलाकात यही नन्द महर के पास हुई। यही पर तीन दिन तक विश्राम किया। नन्द बाबा भगवान की मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना कर यज्ञ का आयोजन किया। तभी से यहाँ यज्ञ, हवन, पूजा लोग करते आ रहे है। 1956 में श्रद्धालुओं ने यहाँ मंदिर का निर्माण किया। नन्द बाबा से जुड़े प्रमाण यहाँ आसपास के गाँव हरकरनपुर, केशवपुर, नदियावा है। मेले में यादव समाज के लोगो द्वारा राजा बलि व पवरिया की पूजा की जाती है। राजा बलि को हिरण्यकश्यप का बंशज माना जाता है। वही पवरिया राजा बलि का सेवक है। जयकारे के साथ झंडा चढ़ाया जाता है। लोग अपने अपने घरों से लाया दूध भी चढ़ाते है। आज भी जानवरो का दूध इस्तेमाल करने से पहले आसपास के लोग नन्द महर धाम पर चढ़ाने आते है।