कुम्भ के दौरान बच्चों के लिये बनेंगे अतिरिक्त आश्रय गृह

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सत्यम शुक्ला की खास रीपोर्ट,

इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश। कुम्भ मेले के दौरान तमाम बच्चे लापता होते हैं। दिव्यांग बच्चों को भी लोग मेले में छोड़ जाते हैं। उस दौरान लापता होने बाले बच्चों को उनके परिवार तक पहुँचाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाल संरक्षण गृहों की संख्या भी कम पड़ जाती है। लापता बच्चों को परिजनों को सौंपने के लिए बाल कल्याण समिति भी सीमित रह जाती है।

कुम्भ मेले में लापता बच्चों को उनके परिजनों तक पहुँचाने के लिए मेला समय तक अतिरिक्त बाल गृह और बाल कल्याण समिति के गठन की जरुरत है यह कहना उपश्रमायुक्त राकेश दिवेदी का है। उनकी अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक में बाल हितैषी कुम्भ बनाने पर मंथन किया गया।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संस्था क्राई (Child Rights & You) के सहयोग से बाल अधिकारों पर काम करने वाले विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साझा मंच महफ़ूज़ – सुरक्षित बचपन है। महफ़ूज़ – सुरक्षित बचपन द्वारा इलाहाबाद में वर्ष 2019 में आयोजित होने वाले कुम्भ मेले को बाल हितैषी बनाने के उद्देश्य से इलाहबाद के विभिन्न समान विचारधारा वाले संगठनों एवं सरकारी मशीनरी के साथ बैठक का आयोजन किया गया।

प्रायः देखा गया है कि कुम्भ मेले में करोड़ो श्रद्धालु स्नानादि के लिए आते है, जिनमे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चो की संख्या भी बहुतायत रहती हैं। मेला क्षेत्र में बाल संरक्षण से सम्बंधित अनेक मुद्दे देखने को मिलते है जिसमे बच्चो का खोना, अपहरण, बाल तस्करी, बालश्रम, बाल भिक्षावृति, बाल यौन शोषण, दिव्यांग बच्चो को बेसहारा छोड़ जाना आदि मुद्दे प्रमुख हैं।

प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत करते हुए महफूज़ के राज्य संयोजक श्री संजय राय ने कहा कि यद्यपि सरकार के विभिन्न तंत्रों द्वारा इनकी रोकथाम के लिए प्रयास किये जाते है, किन्तु मेले में भीड़ एवं व्यवस्था प्रबंध के आगे ये सभी मुद्दे गौण रह जाते है। उक्त मुद्दों को को ध्यान में रखते हुए कुम्भ मेला को बाल हितैषी कुम्भ बनाने के लिए इलाहबाद के राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान में सभी बाल हितग्राहियों के साथ आज की बैठक आहूत की गयी।

रिपोर्ट:-सत्यम शुक्ला, इलाहाबाद।